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व्यायाम के प्रकार

आइये जानते हैं व्यायाम के प्रकार के बारे में (vyayam ke prakar)। ये तो हम सभी जानते हैं कि व्यायाम करना अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरुरी है क्योंकि व्यायाम करने से हमारी बॉडी और माइंड फिट रहते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि व्यायाम यानी एक्सरसाइज कई तरह की होती है।

ऐसे में क्यों ना आज, एक्सरसाइज के प्रकारों के बारे में जाना जाए। तो चलिए, आज आपको बताते हैं कि एक्सरसाइज कितने प्रकार की होती है।

व्यायाम के प्रकार (vyayam ke prakar)

सामान्यतः एक्सरसाइज 6 प्रकर की होती है-

1.आइसोटोनिक एक्सरसाइज (समतानी व्यायाम)– इस प्रकार की एक्सरसाइज में मसल्स के तंतुओं की लम्बाई कम – ज्यादा होती रहती है और मसल्स का तनाव बना रहता है।

इस तरह की एक्सरसाइज में शरीर में हलचल ज्यादा होती है। व्यायाम के इस प्रकार में भागना, दौड़ना, साइकिल चलाना, तैरना, फुटबॉल और टेनिस जैसे खेल खेलना शामिल होता है।

2. आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज (सममितीय व्यायाम)– इस प्रकार की एक्सरसाइज में मसल्स का बल और आकार जल्दी बढ़ता है क्योंकि व्यायाम के इस प्रकार में भार को हाथों से आगे-पीछे या ऊपर-नीचे धकेला जाता है।

ऐसे में ज्यादा हलचल हुए बिना ही मसल्स को काम करना पड़ता है। जिम में मशीनों पर की जाने वाली एक्सरसाइज आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज में आती है।

3. आइसोमेट्रिक और आइसोटोनिक एक्सरसाइज कॉम्बिनेशन– बहुत से लोग आइसोमेट्रिक और आइसोटोनिक एक्सरसाइज को मिलाकर व्यायाम करते हैं जिससे ताकत और सहनशक्ति दोनों बढ़ती है।

इस कॉम्बिनेशन में हाथों को आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज से लाभ मिलता है और पैरों को आइसोटोनिक एक्सरसाइज से मजबूती और स्टैमिना मिलता है।

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4. वॉकिंग (चलना)- व्यायाम के इस प्रकार के बारे में सभी जानते हैं कि ये एक सहज व्यायाम है जिसे हर उम्र के लोग आसानी से कर सकते हैं। चलने से शरीर स्वस्थ रहता है और शरीर एक्टिव और एनर्जेटिक बनता है।

5. गेम्स (खेलकूद)– गेम्स एक्सरसाइज का ऐसा प्रकार है जो ना केवल शरीर को फिट रखता है बल्कि खेलने वाले को इसमें बहुत मजा भी आता है।

इसके अलावा खेल से जुड़े लोग टीमवर्क करना भी सीखते हैं। खेलने से शरीर का हर अंग एक्टिव होता है और फ्लैक्सिबिलिटी और स्टैमिना भी बढ़ता है।

6. योगयोग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाये रखने का एक सम्पूर्ण व्यायाम है जिसमें आसन, मुद्राएं और बंध के जरिए व्यायाम किया जाता है।

आसन– एक निश्चित समय के लिए एक निश्चित स्थिति में बने रहना आसन कहलाता है। शरीर के हर अंग को स्वस्थ बनाये रखने के लिए अलग-अलग आसन किये जाते हैं जिससे सम्पूर्ण शरीर ऊर्जावान और निरोगी बनता है।

मुद्राएं– मुद्राएं भी शरीर को निरोगी बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कुण्डलिनी को जाग्रत करने में मुद्राएं सहायक सिद्ध होती हैं और इनके अभ्यास से शरीर दीर्घायु और निरोगी बनता है।

बंध– मसल्स को कसावट देने वाली क्रियाएं बंध में आती हैं। बंध चार प्रकार के होते हैं- मूल बंध, उड्डियान बंध, जालंधर बंध और महाबंध।

व्यायाम के बहुत से नए तरीके भी इजात कर लिए गए हैं जिन्हें हर व्यक्ति अपनी जरुरत और सहूलियत के अनुसार उपयोग में लेता है। ये तो स्पष्ट है कि अगर आप अपने प्रतिरक्षा तंत्र को इतना मजबूत बनाना चाहते हैं कि आप जल्दी-जल्दी बीमार ना पड़े, आपको बीपी, डायबिटीज और मोटापे जैसी समस्याएं ना हो और अगर ये समस्याएं आपको हैं तो आप उन्हें सही कर सकें तो व्यायाम को अपनी दिनचर्या के सबसे जरुरी कामों में शामिल करिये।

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ऐसा करने से ना केवल आपकी बॉडी फिट और एनर्जेटिक रहने लगेगी बल्कि आप स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं से भी दूर रह पाएंगे इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम का सही विकल्प चुनें और स्वस्थ बने रहें।

व्यायाम के प्रकार

जागरुक टीम को उम्मीद है vyayam ke prakar कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और फिट और एनर्जेटिक बने रहने के लिए प्रेरित भी कर पायी होगी।

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