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वाटर प्यूरीफायर RO, UV और UF में क्या अंतर है?

आइये जानते हैं वाटर प्यूरीफायर RO, UV और UF में क्या अंतर है। वाटर प्यूरीफायर आज हर घर की जरुरत बन गए हैं क्योंकि अशुद्धि के कारण नल का पानी पीने लायक नहीं रह गया है इसलिए सभी अपने घर में वाटर प्यूरीफायर लगाना चाहते हैं। अगर आप भी वाटर प्यूरीफायर खरीदने का सोच रहे हैं तो उससे पहले आपके लिए ये जानना जरुरी है कि RO, UV और UF तकनीक क्या है और इनमें अंतर क्या है।

इस जानकारी के बाद आप जान पाएंगे कि आपके घर के पानी के लिए किस वाटर प्यूरीफायर को खरीदना सबसे सही और सेहत के लिए सुरक्षित रहेगा इसलिए आज आपको बताते हैं RO, UV और UF वाटर प्यूरीफायर के बारे में।

वाटर प्यूरीफायर RO, UV और UF में क्या अंतर है?

सबसे पहले जानते हैं RO वाटर प्यूरीफायर में इस्तेमाल होने वाली टेक्निक के बारे में– RO एक वाटर प्यूरिफिकेशन टेक्निक है जिसमें पानी को साफ करने के लिए प्रेशर का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा करने से पानी में घुली अशुद्धियाँ ख़त्म हो जाती हैं।

इस टेक्निक के फायदे ये हैं कि RO बैक्टीरिया और वायरस को बाहर कर देता है, क्लोरीन और आर्सेनिक जैसी अशुद्धियाँ भी हटा देता है और इस तरह के पानी में किसी तरह की अशुद्धि नहीं बचती।

इतना शुद्ध पानी देने वाली इस तकनीक के कुछ वीक पॉइंट्स भी हैं जैसे कि RO टेक्निक से साफ हुए पानी में से शरीर के लिए आवश्यक मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं और लम्बे समय तक इस पानी को पीने से इम्यूनिटी भी कम हो जाती है।

इसके अलावा RO वाटर प्यूरीफायर से 30-40% पानी तो वेस्ट के रुप में बाहर निकल जाता है। साथ ही ऐसे प्यूरीफायर को चलाने के लिए बिजली की जरुरत पड़ती है।

इस तरह के प्यूरीफायर का इस्तेमाल ऐसे एरिया में किया जाना चाहिए जहाँ पानी में टीडीएस ज्यादा हो यानी बोरवेल के पानी और तटीय इलाकों के पानी को शुद्ध करने के लिए RO प्यूरीफायर उपयुक्त है।

अब UV वाटर प्यूरीफायर में इस्तेमाल होने वाली टेक्निक के बारे में जानते हैं– UV (अल्ट्रा वॉयलेट) टेक्निक में पानी में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस ख़त्म हो जाते हैं लेकिन ये टेक्निक RO टेक्निक की तरह पानी में घुली क्लोरीन और आर्सेनिक की अशुद्धि को नहीं हटाती।

इस टेक्निक में एक मेम्ब्रेन (परत) का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें से पानी को डालने पर पानी में घुली अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं।

इस प्यूरिफिकेशन टेक्निक का नुकसान ये है कि इसके इस्तेमाल से वायरस और बैक्टीरिया ख़त्म तो हो जाते हैं लेकिन पानी से बाहर नहीं जाते हैं। इसके अलावा इसके इस्तेमाल के लिए बिजली की जरुरत भी पड़ती है।

UV वाटर प्यूरीफायर की जरुरत ऐसे एरिया में होती है जहाँ ग्राउंड वाटर मीठा हो और केवल बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करना जरुरी हो, जैसे कि पहाड़ी एरिया और कम प्रदूषित इलाके।

अब जानते हैं UF वाटर प्यूरीफायर में इस्तेमाल होने वाली टेक्निक के बारे में– UF (अल्ट्रा फिल्ट्रेशन) टेक्निक एक फिजिकल टेक्निक है यानी इसके इस्तेमाल के लिए बिजली की जरुरत नहीं पड़ती है।

इस तरह के वाटर प्यूरीफायर में एक मेम्ब्रेन लगी होती है जिसमें से पानी गुजरने पर, उसमें मौजूद बैक्टीरिया और वायरस ख़त्म हो जाते हैं और पानी से बाहर निकाल दिए जाते हैं।

इसके अलावा पानी में घुली अशुद्धियाँ भी साफ हो जाती हैं लेकिन अगर पानी कठोर हो और पानी में क्लोरीन और आर्सेनिक जैसी अशुद्धियाँ ज्यादा मात्रा में मौजूद हो तो इस प्यूरीफायर का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

अब आपके पास RO, UV और UF वाटर प्यूरीफायर से जुड़ी जरुरी जानकारी आ गयी है और आप इन प्यूरिफिकेशन टेक्निक्स के बीच के अंतर को भी समझ गए होंगे इसलिए वाटर प्यूरीफायर खरीदने से पहले इन बातों का जरूर ध्यान रखें और आप जिस भी एरिया में रहते हैं वहाँ के पानी का टीडीएस लेवल पता करके ही सही वाटर प्यूरीफायर चुनें।

जागरूक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और सही वाटर प्यूरीफायर खरीदने में आपकी मदद भी करेगी।

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