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यजुर्वेद में क्या लिखा हुआ है और उसका दैनिक जीवन में क्या उपयोग है?

आइये जागरूक पर जानते हैं यजुर्वेद में क्या लिखा हुआ है और उसका दैनिक जीवन में क्या उपयोग है। हिन्दू धर्म के चार पवित्रतम ग्रंथों में से एक यजुर्वेद है जिसे ऋग्वेद के बाद दूसरा वेद माना जाता है। ये हिन्दू धर्म का श्रुति धर्मग्रन्थ है जिसमें यज्ञ प्रक्रिया के लिए गद्य और पद्य मन्त्र बताये गए हैं। ऐसा माना जाता है कि यजुर्वेद संहिताएं अंतिम रचित संहिताएं थीं जो ई. पू. दूसरी सहस्त्राब्दी के अंत से लेकर पहली सहस्त्राब्दी की आरंभिक शताब्दियों के बीच की है। यजुर्वेद में ऐसी बहुत – सी ज्ञानवर्धक जानकारियां निहित हैं जिनके बारे में आपको भी जरूर जानना चाहिए।

ऐसे में क्यों ना आज, ये जानें कि यजुर्वेद में क्या बताया गया है और वो किस तरह हमारे लिए आज भी उपयोगी साबित हो सकता है। तो चलिए, आज जानते हैं यजुर्वेद के बारे में-

यजुर्वेद में ऋग्वेद के 663 मन्त्र निहित हैं, इसके बावजूद इसे ऋग्वेद से अलग ग्रन्थ माना गया है। इसका प्रमुख कारण ये बताया जाता है कि यजुर्वेद मुख्य रुप से एक गद्यात्मक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में जो पद्यात्मक मन्त्र हैं वो ऋग्वेद या अथर्ववेद से लिए गए हैं।

आइये, यजुर्वेद में लिखित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां लेते हैं:-

  • यजुस शब्द से यजुर्वेद शब्द बना है और यजुस का अर्थ ‘यज्ञ’ होता है।
  • यज्ञ में कहे जाने वाले गद्यात्मक मन्त्रों को ‘यजुस’ कहा जाता है।
  • यजुर्वेद की रचना कुरुक्षेत्र प्रदेश में हुयी।
  • इस वेद का रचनाकाल 1400 से 1000 ई.पू. का माना जाता है।
  • यजुर्वेद से उत्तरवैदिक युग की राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक जीवन की जानकारी मिलती हैं।
  • इस वेद में यज्ञों और हवनों के नियम और विधान है इसलिए ये कर्मकाण्ड प्रधान ग्रन्थ है।
  • इस वेद में आर्यों के सामाजिक और धार्मिक जीवन की जानकारी मिलती है।
  • यर्जुवेद के मंत्रों का उच्चारण ‘अध्वुर्य’ नामक पुरोहित द्वारा किया जाता था।
  • यजुर्वेद के दो मुख्य भाग कृष्ण यजुर्वेद और शुक्ल यजुर्वेद हैं।
  • इस वेद में उत्तरवैदिक युग के राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक जीवन से जुड़ी जानकारी मिलती है।
  • इस वेद में वर्ण व्यवस्था और वर्णाश्रम से जुड़ी जानकारी भी मिलती है।
  • इस वेद में अश्वमेघ जैसे बहुत से यज्ञों का वर्णन मिलता है।

आइये, अब जानते हैं यजुर्वेद का हमारे दैनिक जीवन में क्या उपयोग है ?

ये तो आप भी जानते हैं कि प्राचीन समय और वर्तमान समय में बहुत बदलाव हुआ है लेकिन ये स्पष्ट है कि मौलिक ज्ञान आज भी अपना महत्त्व बनाए हुए है जैसे कि यज्ञ सम्बन्धी ज्ञान। यजुर्वेद एक ऐसा धार्मिक ग्रन्थ है जिसमें यज्ञ और हवन सम्बन्धी नियम और विधान बताये गए हैं और यज्ञ और हवन का महत्व और उपयोगिता तो आज के समय में भी बरकरार है क्योंकि आज परिवारों में जब भी संस्कार और यज्ञीय कर्मकांड करवाए जाते हैं उनके मन्त्र यजुर्वेद से ही लिए जाते हैं। इसका अर्थ ये है कि यजुर्वेद वेद का ऐसा प्रभाग है जो आज भी हमारे जीवन में अपना स्थान बनाये हुए है। इसके अलावा जिस गायत्री मन्त्र और महामृत्युंजय मन्त्र का जाप हम सभी आज भी करते हैं, वो मन्त्र भी यजुर्वेद में निहित हैं।

यज्ञ और हवन सम्बन्धी ज्ञान देने के अलावा ये वेद हमें प्राचीन युग के सामाजिक और धार्मिक जीवन की जानकारी भी प्रदान करता है जो ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। दोस्तों, यजुर्वेद से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आपको मिल गयी है और हमारे दैनिक जीवन में ये ग्रन्थ कितना उपयोगी है, ये भी आप जान चुके हैं।

जागरुक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए उपयोगी भी साबित होगी।

आयुर्वेद के नियम

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