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यीशु मसीह कौन है?

आइये जानते हैं यीशु मसीह कौन है। यीशु मसीह या जीसस क्राइस्ट ईसाई धर्म के प्रवर्तक हैं जिन्हें ईसाई धर्म के लोग परमपिता परमेश्वर का पुत्र मानते हैं। उनसे जुड़ी बहुत-सी बातों पर शोध जारी है और बहुत-सी बातों का स्पष्ट होना अभी बाकी है। ऐसे में आज जानते हैं यीशु मसीह से जुड़ी कुछ ख़ास बातें।

यीशु का जन्म बेथलेहेम में एक यहूदी बढ़ई के घर हुआ था। उनकी माँ का नाम मरियम/मेरी था। 13 से 30 साल की उम्र तक यीशु कहाँ चले गए और उन्होंने क्या किया, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। 30 साल का होने पर उन्होंने येरुशलम में यूहन्ना से दीक्षा ली और उसके बाद वो लोगों को ज्ञान की शिक्षा देने लगे।

जब यीशु 33 साल के थे, तब उनके विरोधियों ने उन्हें क्रूस पर लटका दिया। जिस दिन उन्हें सूली पर चढ़ाया गया उस दिन को गुड़ फ्राइडे कहा गया और जब उन्हें अपनी कब्र के पास जीवित देखा गया तो इस घटना को ईस्टर कहा गया। उस घटना के बाद यीशु कभी भी यहूदी राज्य में दिखाई नहीं दिए।

इतिहासकार यीशु मसीह के जन्म की तारीख 25 दिसंबर को लेकर एकराय नहीं हैं। उनका मानना है कि रोमन काल से ही दिसंबर के अंतिम दिनों में पैगन परंपरा के अनुसार जश्न मनाने का चलन रहा है जिसे ईसाईयों ने भी अपनाया और क्रिसमस नाम दिया।

शोध के अनुसार यीशु ने अपनी शिष्या मेरी मेग्दलीन से शादी की थी और उनके दो बच्चे भी हुए। ईसा मसीह के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों में उनकी पत्नी की मौजूदगी रही है।

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कुछ विद्वानों का मानना है कि ईसा मसीह की भाषा अरामिक रही होगी जबकि कुछ विद्वान मानते हैं कि उनकी भाषा लैटिन और ग्रीक रही होगी।

ईसा मसीह के जीवन और दर्शन के बारे में बाइबिल में वर्णन किया गया है। बाइबिल ईसाई धर्म का पवित्र धर्म ग्रन्थ है। इसमें यहूदी धर्म और यहूदी पौराणिक कथाओं और नियमों का उल्लेख है। माना जाता है कि बाईबल ग्रन्थ को ईसा के 200 साल बाद लिखा गया था।

यीशु मसीह के कुल 12 शिष्य थे और जब यीशु मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया, उसके बाद उनके शिष्य ईसा की वाणी लेकर 50 ईस्वी में भारत आये। भारत में ईसा के सन्देश को फैलाने का कार्य उनके शिष्य थॉमस ने किया।

शोधकर्ताओं का ये भी मानना है कि ईसा मसीह भारत में भी रहे थे। उनके अनुसार, भारत के कश्मीर में एक बौद्ध मठ में रहते हुए उन्होंने 13 से 29 साल की उम्र तक शिक्षा ग्रहण की थी और बाद में उसी मठ में लौटकर अपना पूरा जीवन बिताया था।

ऐसा भी माना जाता है कि श्रीनगर के पुराने शहर में रौजाबल नामक इमारत में एक मकबरा है, जहाँ ईसा मसीह का शव रखा हुआ है।

ईसा मसीह के जीवनकाल को स्पष्टा से समझने के लिए लम्बे समय से शोध जारी है और अब तक के शोधों से मिली ख़ास जानकारियां अब आपके पास भी है।

जागरूक टीम को उम्मीद है यीशु मसीह कौन है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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